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उत्‍तर प्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड

उत्तर प्रदेश सरकार

पं0 दीनदयाल ग्रामोद्योग रोजगार योजना

9. जनपद में कोषागार से पूँजीगत अनुदान की धनराशि के आहरण की व्यवस्था

जिला ग्रामोद्योग अधिकारी ऋणदाता बैंक से पूंजीगत अनुदान क्लेम निर्धारित प्रारूप पर नियमानुसार प्राप्त होने पर उक्त क्लेम का परीक्षण करने के उपरान्त उक्त धनराशि के सापेक्ष बिल बनाकर मुख्य विकास अधिकारी के समक्ष आहरण हेतु प्रस्तुत करेंगे। ट्रेजरी से सीधे आर0टी0जी0एस0 के माध्यम से ऋणदाता बैंकों को भुगतान कर दिया जायेगा।

प्रत्येक वित्तीय वर्ष में समय-समय पर शासन से निर्गत वित्तीय स्वीकृतियों के सापेक्ष बैंकों को अनुदान की धनराशि ट्रेजरी से प्रेषित होने के उपरान्त उपयोगिता प्रमाण-पत्र जिला ग्रामोद्योग अधिकारी पूर्ण विवरण के साथ जनपद के मुख्य विकास अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करेंगे व उनके प्रति हस्ताक्षरोपरान्त निर्धारित प्रारूप पर शासन को प्रेषित करते हुए प्रतिलिपि योजना अधिकारी खादी बोर्ड को प्रेषित करेंगे।

10. पूँजीगत अनुदान का भुगतान

बैंक द्वारा स्वीकृत ऋण की प्रथम किश्त (जो अनुदान राशि से कम न हो) को अवमुक्त करने के पश्चात् ऋणदाता बैंक पूँजीगत अनुदान क्लेम निर्धारित प्रारूप पर नियमानुसार जिला ग्रामोद्योग अधिकारी को प्रस्तुत करेंगे। जिला ग्रामोद्योग अधिकारी क्लेम फार्म के परीक्षण उपरान्त उपयुक्त पाये जाने पर ट्रेजरी से N.E.F.T./R.T.G.S. के माध्यम से उद्यमी के पक्ष में पूँजीगत अनुदान का भुगतान सम्बन्धित ऋणदाता बैंक को करेंगे।

बैंक द्वारा प्राप्त धनराशि का टी0डी0आर0 (टर्म डिपॉजिट रिसीट) बिना ब्याज के बनाकर उद्यमी के पक्ष में रखा जायेगा। पूँजीगत अनुदान की धनराशि (टी0डी0आर0) पर बैंक द्वारा कोई ब्याज नहीं दिया जायेगा और न ही अनुदान धनराशि के बराबर की अवमुक्त ऋण राशि पर बैंक द्वारा ब्याज लिया जायेगा।

11. अनुदान धनराशि का समायोजन

बैंक द्वारा ऋण की प्रथम किस्त की धनराशि अवमुक्त करने के तिथि से तीन वर्ष पश्चात उक्त अनुदान धनराशि का समायोजन निम्न शर्तों के पूर्ण होने पर किया जायेगा।

  • यदि उद्यमी ने ऋण का सदुपयोग किया हो।
  • उद्यमी द्वारा प्रोजेक्ट स्थापना का कार्य स्वीकृत परियोजना अनुसार किया गया हो।
  • यदि इकाई उत्पादन/सेवा कार्य कर रही हो।

प्रथम ऋण वितरण की तिथि से तीन वर्ष पूर्ण होने पर उपरोक्त शर्तों की पुष्टि जिला ग्रामोद्योग अधिकारी एवं ऋणदाता बैंक के संयुक्त स्थलीय निरीक्षण के होने के बाद ही पूँजीगत अनुदान की धनराशि का समायोजन किया जायेगा तथा जिला ग्रामोद्योग अधिकारी का यह दायित्व होगा कि प्रत्येक इकाई की उक्त संयुक्त निरीक्षण रिपोर्ट की एक प्रति योजना अनुभाग, मुख्यालय खादी ग्रामोद्योग बोर्ड को उपलब्ध करायी जायेगी। इकाईयों के पूंजीगत अनुदान/समायोजन की सूचना वित्तपोषित बैंक शाखा द्वारा एक माह के अन्दर जिला ग्रामोद्योग अधिकारी/लाभार्थी को प्रेषित करना अनिवार्य होगा।

12. सम्बन्धित उद्योग

पं0 दीन दयाल ग्रामोद्योग रोजगार योजना के अन्तर्गत खादी तथा ग्रामोद्योग आयोग, मुम्बई द्वारा चिन्ह्ति (उद्यम) उद्योग एवं सेवा गतिविधियॉं जिन्हें आयोग द्वारा वित्तपोषण करने हेतु अनुमन्य किया गया है वे सभी उद्यम इस योजना के अर्न्तगत वित्तपोषण हेतु अनुमन्य होंगे।

13. योजना के क्रियान्वयन हेतु प्रक्रिया

  • योजना के प्रस्तर 4 के अन्तर्गत वर्णित पात्र उद्यमियों के ऋण प्रार्थना-पत्र स्थानीय समाचार पत्रों में विज्ञप्ति/विज्ञापन द्वारा समय-समय पर जिला ग्रामोद्योग अधिकारी द्वारा निर्धारित प्रारूप पर आवेदन पत्र प्राप्त किया जायेगा। योजनान्तर्गत विभाग की विभाग की वेबसाइट www.upkvib.gov.in से भी आवेदन पत्र डाउनलोड किये जा सकेंगे।
  • इस प्रकार प्राप्त उक्त प्रार्थना पत्रों की सूची जिला ग्रामोद्योग अधिकारी द्वारा एक रजिस्टर में अंकित करने के बाद जिला स्तरीय कार्यदल के अध्यक्ष से साक्षात्कार हेतु तिथि एवं समय निर्धारित करने के उपरान्त लाभार्थी के चयन हेतु साक्षात्कार कराया जायेगा।

जिला स्तरीय टास्क फोर्स कमेटी (डी.एल.टी.एफ.सी.) से चयनित लाभार्थियों का आवेदन पत्र बैंकों को अनिवार्य रूप से 15 दिन के अन्दर जिला ग्रामोद्योग अधिकारी प्रेषित करना सुनिश्चित करेंगें। ऋण स्वीकृत की सूचना बैंक शाखा द्वारा सम्बन्धित जिला ग्रामोद्योग अधिकारी व उद्यमियों को दी जायेगी।

स्वीकृत प्रार्थना-पत्रों की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद बैंक द्वारा ऋण वितरित किया जायेगा इसकी सूचना जिला ग्रामोद्योग अधिकारी को दी जायेगी।

पं0 दीन दयाल ग्रामोद्योग रोजगार योजना के अन्तर्गत स्वीकृत उपरान्त ऋण की प्रथम किस्त (जो पूँजीगत अनुदान की धनराशि से कम न हो) का भुगतान करने के उपरान्त ही नियमानुसार बैंक द्वारा 15 दिवस के अन्तर्गत पूँजीगत अनुदान का क्लेम सम्बन्धित जिले के जिला ग्रामोद्योग अधिकारी को प्रेषित करेंगे, जिसका परीक्षण करने के उपरान्त जिला ग्रामोद्योग अधिकारी पूँजीगत अनुदान का भुगतान नियमानुसार शासन/विभाग द्वारा निर्धारित व्यवस्था अन्तर्गत करेंगे।

(क) 

यदि उद्यमी ने ऋण का दुरूपयोग किया हो।

(ख)

यदि उद्यमी ने प्रोजेक्ट का कार्य पूरा नही किया और जान-बूझकर चूक कर रहा हो।

(ग)

यदि इकाई उत्पादन/सेवा कार्य नहीं कर रही हो अथवा बन्द हो।

(घ)

तीन वर्ष बाद जिला ग्रामोद्योग अधिकारी एवं ऋणदाता बैंक के संयुक्त स्थलीय निरीक्षण में इकाई के कार्यरत होने की पुष्टि के बाद ही पूँजीगत अनुदान का समायोजन किया जायेगा।