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उत्‍तर प्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड

उत्तर प्रदेश सरकार

बोर्ड योजनाएं

अध्याय - 9

बोर्ड की मुख्य योजनाएं

उ०प्र० खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा जिला सेक्टर की मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना तथा खादी और ग्रामोद्योग आयोग की प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम योजना संचालित की जा रही है।

ग्रामीण औद्योगीकरण के क्षेत्र मे उ०प्र० खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड की अहम भूमिका है। इसका सीधा सम्बन्ध ग्रामीण अर्थव्यवस्था, अनुसूचित जाति/ जन जाति/, अल्पसंख्यक, महिलाओं, विकलांग, भूतपूर्व सैनिक एवं पिछड़े वर्ग के उत्थान से है।

ग्रामीण क्षेत्र में आज भी परम्परागत कौशल को बढ़ावा देने से विकास की अच्छी सम्भावना है। ग्रामीण अंचलों के शिक्षित बेरोजगार युवकों को प्रशिक्षित करके उन्हें अपने ही गाँव में मनपसन्द उद्योग स्थापित करने में बोर्ड आर्थिक सहायता प्रदान करता है।

खादी तथा ग्रामोद्योग की परिभाषाएं

"खादी" का अर्थ है कपास, रेशम या ऊन के हाथ कते सूत अथवा इनमें से दो या सभी प्रकार के सूत के मिश्रण से भारत में हथकरघे पर बुना गया कोई वस्त्र।

"ग्रामोद्योग" का अर्थ है, ऐसा कोई भी उद्योग, जो ग्रामीण क्षेत्र में स्थित हो तथा जो विद्युत के उपयोग या बिना उपयोग के कोई माल तैयार करता हो या कोई सेवा प्रदान करता हो तथा जिसमें पूँजी निवेश (संयंत्र तथा मशीनरी एवं भूमि भवन में) प्रति कारीगर या कर्मी पचास हजार रूपये से अधिक न हो। इस हेतु परिभाषित "ग्रामीण क्षेत्र" में समस्त राजस्व ग्राम तथा 20 हजार तक की आबादी वाले कस्बे सम्मिलित है।

ऋण सहायता सुविधा किसको ?

उ०प्र० खादी तथा ग्रामोद्योग द्वारा दी जाने वाली सहायता सुविधा हेतु निम्न पात्र है।

  1. पंजीकृत ग्रामोद्योगी सहकारी समितियाँ।
  2. पंजीकृत स्वयं सेवी संस्थाएं।
  3. व्यक्तिगत उद्यमियों के साथ-साथ शिक्षित बेरोजगार नवयुवकों, महिलाओं, अनुसूचित जाति व जनजाति के सदस्य एवं परम्परागत कारीगर।

सहायता किन ग्रामीण उद्योगों हेतु दी जाती है ?

खादी ग्रामोद्योग को 7 समूहों में बांटा गया है, जिसके अन्तर्गत निम्नलिखित उद्योग आते है।

1. खनिज आधारित उघोग

  1. कुटीर कुम्हारी उद्योग।
  2. चूना पत्थर,चूना सीपी और अन्य चूना उत्पाद उद्योग।
  3. मन्दिरों एवं भवनों के लिए पत्थर कटाई, पिसाई,नक्काशी तथा खुदाई।
  4. पत्थर से बनी हुई उपयोगी वस्तुएं।
  5. प्लेट और स्लेट पेंसिल निर्माण।
  6. प्लास्टर आफ पेरिस का निर्माण।
  7. बर्तन धोने का पाउडर।
  8. जलावन के ब्रिकेट्स।
  9. सोना चाँदी, पत्थर सीपी और कृत्रिम सामग्रियों से आभूषणों का निर्माण।
  10. गुलाल, रंगोली निर्माण।
  11. चूड़ी निर्माण।
  12. पेंट, रंजक, वार्निश और डिस्टेम्पर निर्माण।
  13. काँच के खिलौने का निर्माण।
  14. सजावटी शीशे की कटाई, डिजाइनिंग, पालिशिंग।
  15. रत्न कटाई।