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उत्‍तर प्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड

उत्तर प्रदेश सरकार

मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना

7. ऋण सीमा

इस योजना के अन्तर्गत सभी पात्र उद्यमियों को सावधि ऋण/कार्यशील पूंजी सम्मिलित करते हुए रु0 10.00 लाख तक के बैंक ऋण पर ब्याज उपादान देय होता है। सामान्य वर्ग के उद्यमियों द्वारा प्रोजेक्ट लागत का 10 प्रतिशत अंशदान तथा अनुसूचित जाति/जनजाति/महिला/विकलांग/ अल्पसंख्यक/भूतपूर्व सैनिक वर्ग के उद्यमियों को प्रोजेक्ट लागत का पॉंच प्रतिशत अंशदान स्वयं वहन करना होगा।

8. जमानत/अंशदान/प्रतिभूति एवं मार्जिन मनी

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा समय-समय पर जारी निर्देशानुसार मार्जिन मनी/जमानत व प्रतिभूति की शर्त लागू होती है। जमानत की राशि रु0 10.00 लाख के ऋण हेतु भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा बंधकमुक्त है।

9. पुनर्वित्त

इस योजना के अन्तर्गत सम्मिलित की गयी योजनाओं जिसमें सावधि ऋण एवं कार्यशील पूंजी दोनों मदों हेतु बैंकों द्वारा ऋण दिये जायेंगे, पर राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक व लघु उद्योग विकास बैंक द्वारा पुनर्वित्त दिया जायेगा जिसकी सूचना समय-समय पर इनके द्वारा बैंक को भी प्रेषित की जायेगी।

10. ब्याज उपादान पात्रता प्रमाण-पत्र

इस योजना के अन्तर्गत बैंक ऋण स्वीकृति पर ब्याज उपादान दिये जाने हेतु पात्रता प्रमाण पत्र जिला ग्रामोद्योग अधिकारी द्वारा जारी किया जायेगा तथा नवीनीकरण भी सम्बन्धित जिला ग्रामोद्योग अधिकारी द्वारा जारी किया जायेगा। प्रमाण पत्र का प्रारूप परिशिष्ट ‘‘क’’ पर संलग्न है।

11. ब्याज उपादान दावों का भुगतान

योजना में उ0प्र0 शासन द्वारा समय -समय पर संशोधित किया जाता है, (जिसके लिये ब्याज उपादान का प्राविधान वर्ष 1994-95 हेतु जिला योजना आवंटित कोड संख्या 2851-40100 द्वारा किया गया। संशोधित योजना यथावत लागू रहती है। कालान्तर में निर्धारित कोड संख्या के अन्तर्गत बजट का प्राविधान कर इसको स्थायित्व दिया गया। जिला योजना में उपलब्ध धनराशि सम्बन्धित खाते से आहरित कर भारतीय स्टेट बैंक की कोई भी शाखा जिले के अग्रणी बैंक की मुख्यालय पर स्थिति शाखा/योजनान्तर्गत वित्त पोषण में अधिकतम सहयोग प्रदान करने वाली बैंक शाखा में रखा जाता है, जिसमें आहरण/परिचालन का अधिकारी, सम्बन्धित जिला ग्रामोद्योग अधिकारी/प्रबन्धक (ग्रामोद्योग) को प्राविधानित किया गया है। उक्त धनराशियों में से खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा निर्धारित प्रारूप पर बैंक की शाखा द्वारा ब्याज उपादान दावा बिल जिला ग्रामोद्योग अधिकारी नियमानुसार भुगतान करते है जो सम्बन्धित बैंक शाखा को किया जाता है। भुगतान आर0टी0जी0एस0 द्वारा किया जाता है। जिला ग्रामोद्योग अधिकारी इस सम्बन्ध में पूर्ण विवरण इकाईवार/उद्योगवार एक रजिस्टर पर तैयार करते हैं जिसकी सूचना प्रत्येक माह निर्धारित रूप-पत्रों पर मुख्यालय को प्रेषित करते है जिसका अनुश्रवण मुख्यालय के ‘‘मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना’’अनुभाग द्वारा किया जाता है। इस सम्बन्ध में निम्न प्रकार की कार्यवाही की जाती है-

  1. जिला योजना के अन्तर्गत आवंटित कोड संख्या 2851-40100 के अन्तर्गत जिला ग्रामोद्योग अधिकारी जिला ऋण योजना में आवंटन/मांग की गयी बैंक ऋण राशि के दसवें हिस्से के बराबर की धनराशि की मांग प्रस्तुत करते हैं।
    नोटः- यह भी स्पष्ट करना आवश्यक है कि जिला ऋण योजना में मांग की जाने वाली धनराशि सम्बन्धित वित्तीय वर्ष में प्रस्तावित इकाईयों व गत वर्ष में कार्यरत इकाईयों की धनराशि भी शामिल की जाती है।
  2. जिला योजना में आवंटित धनराशि, सम्बन्धित जिला के मुख्य विकास अधिकारी द्वारा आहरित कर जिला ग्रामोद्योग अधिकारी/प्रबन्धक (ग्रामोद्योग) को उपलब्ध करायी जायेगी जिसे जिला ग्रामोद्योग अधिकारी मूल योजना के प्रस्तर-11 में लिखित बैंक/बैंकों में शीर्षक ‘‘मुख्य मंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना’’उपादान धनराशि वर्ष .................. अन्तर्गत खाता खोलकर जमा करायेंगे जिसकी सूचना मुख्यालय को प्रेषित करेंगे।
  3. उक्त खाता से चेक/ड्राफ्ट जिले के विभिन्न बैंकों के सम्बन्धित बैंको की शाखा द्वारा निर्धारित प्रारूप परिशिष्ट ‘ख एवं ‘ग’के अनुसार प्राप्त होने पर भुगतान हेतु चेक/ड्राफ्ट जिला ग्रामोद्योग अधिकारी जारी करेंगे तथा सभी लेन-देन का लेखा-जोखा एक रजिस्टर पर अंकित करेंगे। प्रत्येक कलेण्डर माह पर उक्त रजिस्टर का पूर्ण विवरण (बैंक खाते का मिलान) मुख्यालय के ‘‘मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना’’अनुभाग को प्रेषित किया जायेगा।

12. सम्बन्धित उद्योग

इस योजना के अन्तर्गत खादी और ग्रामोद्योग आयोग, मुम्बई, सम्प्रति, आयुक्त, खादी और ग्रामोद्योग, भारत सरकार, मुम्बई द्वारा समय-समय पर चिन्ह्ति उद्योग एवं सेवा गतिविधियों से सम्बन्धित नाबार्ड द्वारा अनुमोदित प्रोजेक्ट स्थानीय उपायुक्त के अनुरूप ग्रामोद्योग इकाईयों के प्रोजेक्ट होते है जो 10.00 लाख रु0 तक की लागत के होते है। वर्तमान में चिन्हित उद्योगों/सेवा गतिविधियों की सूची परिशिष्ट ‘घ’पर संलग्न है।