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उत्‍तर प्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड

उत्तर प्रदेश सरकार

मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना

13. ऋण वितरण-ब्याज उपादान सम्बन्धी प्रक्रिया

  1. योजना के प्रस्तर 4 के अन्तर्गत वर्णित पात्र उद्यमियों के ऋण प्रार्थना-पत्र विभिन्न संस्थाओं/उद्यमियों के व्यक्तिगत सम्पर्क/विभिन्न राजकीय विभागों व स्थानीय समाचार पत्रों में विज्ञप्ति द्वारा समय-समय पर जिला ग्रामोद्योग अधिकारी द्वारा प्राप्त की जाती है। ऋण प्रार्थना पत्र यथा सम्भव बैंकों द्वारा निर्धारित प्रार्थना-पत्र पर लिया जाता है। यदि प्रार्थना-पत्र मिलने में असुविधा होती है तो बोर्ड द्वारा व्यक्तिगत उद्यमियों के प्रार्थना पत्र प्रयोग में लाये जाते हैं, जिनसे बाद में बैंक द्वारा निर्धारित प्रारूप पर प्रार्थना पत्र प्राप्त कर लिया जाता है।
  2. इस प्रकार प्राप्त प्रार्थना पत्रों की सूची जिला ग्रामोद्योग अधिकारी द्वारा एक रजिस्टर में अंकित करने के बाद चयन हेतु गठित समिति के सभी सदस्यों को उपलब्ध करायी जाती है। चयन समिति की बैठक में चयनित उद्यमियों को ऋण प्रार्थना पत्र उद्यमियों द्वारा प्रस्तावित बैंक शाखा में पत्र द्वारा प्रेषित किये जाते है।
  3. उद्यमियों के चयन मापदण्ड हेतु योजना के प्रस्तर 4, 5 व 6 में निहित निर्देशों का पालन किया जाना आवश्यक है।
  4. सम्बन्धित बैंक के शाखा प्रबन्धक, जिला ग्रामोद्योग अधिकारी द्वारा प्रेषित प्रार्थना-पत्रों को शाखा के रजिस्टर में मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना शीर्षक के अन्तर्गत करते है और ऋण स्वीकृति सम्बन्धी अन्य आवश्यक कार्यवाही/औपचारिकताएं भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार (अधिकतम 06 सप्ताह के अन्दर) प्रार्थना-पत्रों का निस्तारण सुनिश्चित करते है।
  5. ऋण स्वीकृत की सूचना बैंक शाखा द्वारा सम्बन्धी जिला ग्रामोद्योग अधिकारी व उद्यमियों को बैंक द्वारा दी जाती है।
  6. यदि किसी प्रार्थना-पत्र को शाखा द्वारा अनुपयुक्त पाया जाता है तो उसकी विस्तृत जानकारी सहित सूचना अपने बैंक के नियंत्रण अधिकारी को शाखा द्वारा दी जाती है।
  7. शाखा से प्राप्त इस प्रकार के प्रार्थना-पत्रों का परीक्षण बैंक के नियंत्रण अधिकारी द्वारा करने के पश्चात् यदि प्रार्थना-पत्र निरस्त किया जाता है तो समुचित कारणों के साथ जिला ग्रामोद्योग अधिकारी को प्रार्थना-पत्र नियंत्रण अधिकारी/ शाखा प्रबंधक द्वारा प्रेषित किया जाता है। किसी प्रार्थना-पत्र के निरस्त करने का अधिकार बैंक से सम्बन्धित शाखा के नियंत्रक अधिकारी में निहित है। बैंक की शाखाएं प्रत्येक प्रार्थना पत्र के सम्बन्ध में निरस्त/स्वीकृति का रिकार्ड रजिस्टर में रखते है।
  8. स्वीकृत प्रार्थना-पत्रों की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद बैंक द्वारा ऋण वितरित किया जाता है तथा प्रोजेक्ट पूरा होने/पूर्ण ऋण वितरित होने के बाद बैंक शाखा द्वारा इसकी सूचना जिला ग्रामोद्योग अधिकारी को दी जाती है।
  9. बैंक शाखा प्रबंधक उक्त खाते से सम्बन्धित भुगतान का चेक/ड्राफ्ट सम्बन्धित उद्यमी के ऋण खाते में समायोजित कर देंगे। यह प्रक्रिया प्रत्येक 06 मास ब्याज लगाने के उपरान्त की जायेगी।
  10. किसी भी उद्यमी को इस योजना के अन्तर्गत ऋण स्वीकृत होने के पश्चात् ब्याज उपादान का लाभ निम्न परिस्थितियों में देय नहीं होता है
    1. यदि उद्यमी ने ऋण का दुरूपयोग किया हो।
    2. यदि उद्यमी ने प्रोजेक्ट का कार्य पूरा नहीं किया और जानबूझकर चूक कर रहा हो।
    3. यदि खाता बैंक द्वारा डिफाल्ट घोषित किया गया हो।
    4. यदि इकाई उत्पादन/सेवा कार्य नहीं कर रही हो, अथवा बन्द हो।
    5. नोटः- किसी भी दैवी आपदा के कारण या असामयिक दुर्घटना के कारण यदि उद्यमी का उद्योग प्रभावित होता है तो इसका परीक्षण बैंक शाखा प्रबन्धक व जिला ग्रामोद्योग अधिकारी द्वारा संयुक्त रूप से किया जायेगा और उनकी संस्तुतियों के आधार पर उद्यमी को ब्याज उपादान देने के सम्बन्ध में निर्णय बोर्ड मुख्यालय द्वारा किया जायेगा।

14. अतिरिक्त कार्यशाला पूंजी उपलब्ध कराना

यदि इकाई द्वारा कोई बड़ा आपूर्ति आदेश/निर्यात का आदेश प्राप्त होता है जिसके लिये अतिरिक्त कार्यशील पूंजी की आवश्यकता है तो ऋण दाता बैंक को अतिरिक्त कार्यशील पूंजी/सी0सी0लिमिट बढ़ाने पर विचार करना होगा।

15. जागरूकता प्रशिक्षण शिविर

मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना के अन्तर्गत लाभार्थियों को आकर्षित करने तथा ग्रामीण क्षेत्र के जन-मानस को योजना की जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जागरूकता प्रशिक्षण शिविरों के ब्लाक स्तर पर आयोजन हेतु ब्याज उपादान हेतु शासन से स्वीकृत धनराशि का 01 प्रतिशत धनराशि का प्राविधान है।

16. योजना का प्रचार-प्रसार

योजना के प्रचार-प्रसार, सार्वजनिक स्थानों पर होर्डिंग, योजना की जानकारी हेतु पम्पलेट/हेण्डबिल्स के मुद्रण, प्रिंटिंग तथा रेडियो व टी0वी0 के माध्यम से प्रचार-प्रसार हेतु कुल ब्याज उपादान की 01 प्रतिशत धनराशि का प्राविधान है।

17. ईकाईयों का पुर्नजीवीकरण

पूर्व में वित्तपोषित इकाईयॉं यदि किसी दैविक आपदा/असामयिक दुर्घटना के कारण अथवा अपरिहार्य कारण से रुग्ण अथवा मृत हो जाती है तो जिला स्तर पर गठित समिति द्वारा कारणों का आकलन कर इकाई के पुर्नजीवीकरण पर विचार कर पुनः वित्त पोषित किये जाने का निर्णय लिया जायेगा जिसमें नियमानुसार ब्याज उपादान देय होगा।

18. योजना का मूल्यांकन एवं अनुश्रवण

योजना के सफल संचालन हेतु इकाईयों के भौतिक सत्यापन, मुल्यांकन एवं योजना के संचालन में आ रही कठिनाईयों के आकलन हेतु जिला ग्रामोद्योग अधिकारी द्वारा शत-प्रतिशत, परिक्षेत्रीय ग्रामोद्योग अधिकारी द्वारा 20 प्रतिशत तथा मुख्यालय स्तर के अधिकारियों द्वारा 5 प्रतिशत किया जायेगा। इसके अतिरिक्त नियोजन विभाग के राज्य मूल्यांकन एवं अनुश्रवण प्रभाग द्वारा भी समय-समय पर योजना का रैण्डम मूल्यांकन कराया जायेगा, जिसके लिये ब्याज उपादान के कुल बजट का 01 प्रतिशत बजट प्राविधान योजना के मूल्यांकन एवं अनुश्रवण हेतु निहित होगा।

19. वसूली

यदि इकाई जानबूझकर ऋण धनराशि का दुरुपयोग करती है अथवा इकाई का परियोजनानुसार स्थापना एवं संचालन नही होता है तो ऐसी दशा में बैंकों द्वारा ऋण वसूली इकाई से पूर्ण की जायेगी एवं विभाग द्वारा दी गयी सरकारी अनुदान (ब्याज उपादान) की धनराशि भी बैंकों द्वारा वसूल की जायेगी। वसूला गया सरकारी अनुदान (ब्याज उपादान) की धनराशि बोर्ड मुख्यालय पर खाता खोलकर रखा जायेगा तथा पुनः आवश्यकतानुसार उपयोग में लायी जायेगी।

बैंक द्वारा वसूली गयी धनराशि का 10 प्रतिशत अथवा ब्याज उपादान के रूप में दी गयी धनराशि जो भी कम हो वह बैंक द्वारा वसूल कर उ0प्र0 खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड को दी जायेगी।

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1 ‘परिशिष्ट-क’ 1.73 MB हिंदी 24.08.2017 04:00pm pdf विस्तार से देखें
2 ‘परिशिष्ट-ख’ 1.73 MB हिंदी 24.08.2017 04:10pm pdf विस्तार से देखें
3 ‘परिशिष्ट-ग’ 1.73 MB हिंदी 24.08.2017 04:20pm pdf विस्तार से देखें
4 ‘परिशिष्ट-घ’ 1.73 MB हिंदी 24.08.2017 04:30pm pdf विस्तार से देखें