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(3) पर्यवेक्षण एवं जवाबदेही सहित निर्णय लेने की प्रक्रिया
Decision
making process including channels of Supervision and
Accountability
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बोर्ड एक स्वायत्तशासी निगमित निकाय है जिसमें शिखर
पर संचालक मण्डल एवं सबसे निचले स्तर पर सहायक विकास अधिकारीगण विभिन्न
स्तर के दायित्वों का निर्वहन करते हैं एवं अपने अधिकारों के अन्तर्गत
पूर्ण पारदर्शी ढंग से निर्णय लेते हैं।
जनहित में राज्य सरकार अधिनियम की धारा 16 के
अन्तर्गत बोर्ड को निर्देश दे सकती है। संचालक मण्डल द्वारा समय-समय पर
निम्नानुसार निर्णय लिये जाते हैं -
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नीति विषयक समस्त मामले।
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श्रेणी 'क' के कार्मिकों के अधिष्ठान सम्बन्धी मामले।
संचालक मण्डल की प्रत्येक त्रैमास में एक बैठक का प्राविधान है परन्तु
आवश्यकता पड़ने पर इसके पूर्व भी बैठक आयोजित की जा सकती है।
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संचालक मण्डल की बैठकों की कार्यवाहीं, कार्यवाही
रजिस्टर में दर्ज की जाती है जो निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जन साधारण
के अवलोकनार्थ उपलब्ध रहेगी।
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मुख्य कार्यपालक अधिकारी के पास समस्त प्रशासनिक
निर्णय लेने का अधिकार है।
संचालक मण्डल के निर्णयों का क्रियान्वयन मुख्य कार्यपालक अधिकारी एवं
अधीनस्थ अधिकारियों के स्तर पर किया जाता है।
लाभार्थियों का चयन परिक्षेत्रीय अधिकारियों की अध्यक्षता में गठित जिला
स्तरीय चयन समिति के द्वारा किया जाता है-जिसमें जिले के लीड बैंक अधिकारी,
नाबार्ड के जिला प्रबन्धक, सामान्य प्रबन्धक, जिला उद्योग केन्द्र व जिला
ग्रामोद्योग अधिकारी सदस्य सचिव होते हैं।
चयन समिति द्वारा चयनित एवं संस्तुत लाभार्थियों के ऋण आवेदन पत्र
सम्बन्धित बैंको को जिला ग्रामोद्योग अधिकारी स्तर से प्रेषित किये जाते
हैं तथा स्वीकृति उपरान्त मार्जिन मनी/ब्याज उपादान की धनराशि नियमानुसार
सम्बन्धित बैंक शाखा को सीधे उपलब्ध कराई जाती हैं।
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