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उत्‍तर प्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड

उत्तर प्रदेश सरकार

कर्तव्य एवं दायित्व

13. जिला ग्रामोद्योग अधिकारी

  1. अपने कार्य क्षेत्र में औद्योगिक सम्भाव्यता का सर्वेक्षण करना और उपलब्ध कच्चे माल का विवरण आदि रखना। खादी ग्रामोद्योग की इकाईयों को विस्तृत जानकारी उपलब्ध करवाना।
  2. क्षेत्र की सम्भावनाओं को देखते हुए औद्योगिक सहकारी समितियों अथवा संस्थाओं का गठन कराना, इस हेतु उनके कागजातों को तैयार कर नियमानुसार पंजीकृत कराना।
  3. खादी ग्रामोद्योग के विकास के उद्देश्य से कार्य करने वाली सहकारी समितियों/संस्थाओं के आर्थिक सहायता के मांगपत्रों को अपनी संस्तुति/निरीक्षण रिपोर्ट के साथ बोर्ड को प्रेषित करना।
  4. खादी तथा ग्रामोद्योग हेतु दी गयी सहायता का उद्देश्यानुसार उपयोग करवाने की कार्यवाही करना।
  5. खादी ग्रामोद्योगों की उत्पादित वस्तुओं के विक्रय/विपणन में सहायता देना।
  6. अपने अधीनस्थ तहसील अथवा विकास खण्ड स्तर पर कार्य करने वाले कर्मचारियों से योजनाओं का क्रियान्वयन कराना तथा उनको उचित मार्गदर्शन देना।
  7. समितियों/संस्थाओं एवं व्यक्तियों को दी गयी सहायता तथा प्रगति का विवरण संकलित कराना तथा मुख्य कार्यालय को समय पर भेजना।
  8. समय पर वाजिब ऋण तथा अन्य धन की वसूली करना और उसका विवरण मुख्य कार्यालय को भेजना।
  9. निष्क्रिय समितियों/संस्थाओं को पुनर्जीवित करने के लिए नियमानुसार कार्यवाही करना।
  10. अपने जिले की समस्त सहकारी समितियों/संस्थाओं के सम्बन्ध में वित्तीय तथा अन्य सूचनायें कार्यालय में रखना।
  11. बोर्ड के मुख्यालय द्वारा प्रसारित आदेशों का पालन करना।
  12. अन्य कृत्यों का वहन करना, जो समय-समय पर बोर्ड द्वारा दिये जायें।

14. सहायक विकास अधिकारी (प्रथम/द्वितीय)

लघु उद्योगों एवं ग्रामोद्योगों की स्थापना हेतु निम्न कार्यो को निष्पादित करना।

सर्वेक्षण

  1. क्षेत्र के कच्चे माल की उपलब्धता का सर्वेक्षण।
  2. आर्टिजन की संख्या का सर्वेक्षण तथा तकनीकी उपलब्धता का विवरण रखना।
  3. तैयार माल के लिए मार्केट की उपलब्धता का विवरण रखना।
  4. यातायात के साधनों/आर्थिक स्थिति आदि की सूचना रखना।

संगठनात्मक कार्य

  1. समितियों एवं संस्थाओं के गठन का प्रस्ताव तैयार करना।
  2. समितियों एवं संस्थाओं के सदस्यों को सम्बन्धित ग्रामोद्योग में प्रशिक्षण दिलवाना।
  3. मशीनरी उपकरणों की व्यवस्था करना।
  4. समितियों को तकनीकी सलाह देने हेतु मुख्यालय के अधिकारियों के माध्यम से व्यवस्था करना।
  5. ग्रामोद्योग की स्थापना हेतु ऋण एवं अनुदान उपलब्ध कराना।
  6. मुख्यालय स्तर पर समितियों/संस्थाओं एवं व्यक्तिगत उद्यमियों की कठिनाईयों को दूर करना।
  7. समितियों द्वारा उत्पादित माल की बिक्री की व्यवस्था करना।
  8. राजकीय कार्यालयों एवं विभागों से सम्पर्क स्थापित करके इकाईयों के माल सप्लाई की व्यवस्था में सहयोग करना।
  9. समितियों/संस्थाओं/व्यक्तिगत उद्यमियों को दिये गये ऋण अनुदान के सदुपयोग की जाँच करना।
  10. समितियों/संस्थाओं/व्यक्तिगत उद्यमियों से वसूली कराना।
  11. सुशुप्त पड़ी हुई समितियों के पुनर्जीवीकरण व बन्द समितियों को भंग करने की कार्यवाही करना|