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उत्‍तर प्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड

उत्तर प्रदेश सरकार

कृत्य एवं कर्तव्य

प्रदेश में खादी ग्रामोद्योग के चतुर्मुखी विकास के लिए उत्तर प्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग अधिनियम सं०-10ए 1960 के अन्तर्गत बोर्ड का गठन एक सलाहकार परिषद के रूप में हुआ था। तदोपरान्त उत्तर प्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड (संशोधित) अधिनियम 1966 द्वारा उपरोक्त अधिनियम को संशोधित किया गया, जिसके फलस्वरूप बोर्ड को खादी ग्रामोद्योग की योजनाओ को प्रदेश में क्रियान्वित करने का अधिकार प्राप्त हो गया। इस प्रकार खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड एक स्वायत्तशासी संस्था के रूप में पुनर्गठित हुआ तथा अप्रैल, 1967 में उद्योग निदेशालय उ० प्र० से समस्त खादी गामोद्योगी योजनाएं बोर्ड को स्थानान्तरित कर दी गयीं। उक्त से पूर्व ये योजनाएं प्रथम एवं द्वितीय पंचवर्षीय योजनाकाल में उद्योग निदेशालय के अन्तर्गत संचालित की जा रही थी। बोर्ड में आने पर खादी ग्रामोद्योग योजनाओं का पर्याप्त फैलाव हुआ।

खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड का उद्देश्य छोटे-छोटे उद्योगो तथा कम पूँजी निवेश के उद्योगों को स्थापित कर अधिक से अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना है।


संचालक मण्डल

अधिनियम की धारा-5 उपधारा-1 के अन्तर्गत बोर्ड में पाँच सरकारी एवं सात गैर सरकार सदस्य होते हैं। जुलाई 1984 में बोर्ड अधिनियम के पुनरीक्षित होने के फलस्वरूप प्रदेश के खादी ग्रामोद्योग मंत्री बोर्ड के पदेन अध्यक्ष नामित किये गये हैं। इसके अतिरिक्त नामित सात गैर सरकारी सदस्यो में से ही एक पूर्णकालिक उपाध्यक्ष का विधान बोर्ड संगठन में किया गया है।

  1. उ० प्र० सरकार के खादी ग्रामोद्योग मंत्री - पदेन अध्यक्ष
  2. उपाध्यक्ष (गैर सरकारी)
  3. छ: अन्य गैर सरकारी सदस्य
  4. राज्य सरकार द्वारा नामित 5 सरकारी सदस्य
  5. मुख्य कार्यपालक अधिकारी - सदस्य सचिव

बोर्ड के उद्देश्य

खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे-मोटे तथा कम पूँजी निवेश के उद्योगों को स्थापित कर अधिक से अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना है।

बोर्ड के कार्य

बोर्ड के अधिनियम की धारा 15 के अनुसार बोर्ड के निम्नलिखित कार्य है

  1. प्रदेश में खादी तथा ग्रामोद्योग की स्थापना, इसका संगठन विकास एवं विनियमन करना तथा अपने द्वारा बनायी गयी योजनाओं को क्रियान्वित करना।
  2. खादी के उत्पादन एवं अन्य ग्रामोद्योग में लगे हुए अथवा उसमें अभिरूचि रखने वाले व्यक्तियों के प्रशिक्षण की योजना बनाना तथा उनका संगठन करना।
  3. कच्चे माल तथा उपकरण की व्यवस्था के लिए सुरक्षित भण्डार बनवाना और उन्हें खादी के उत्पादन अथवा ग्रामोद्योग में लगे हुए व्यक्तियों को ऐसी मितव्ययी दरो पर देना जो बोर्ड की राय में उपयुक्त हों।
  4. खादी एवं ग्रामोद्योगी वस्तुओं के प्रचार तथा क्रय-विक्रय की व्यवस्था करना।
  5. खादी उत्पादन की विधियों में अनुसंधान करना एवं अन्य ग्रामोद्योग विकास से सम्बन्धित समस्याओं के लिए समाधान सुनिश्चित करना।
  6. खादी तथा ग्रामोद्योगी वस्तुओं के विकास के लिए स्थापित संस्थाओं का अनुश्रवण करना या उनके अनुरक्षण में सहायता करना।
  7. खादी तथा ग्रामोद्योगी वस्तुओं का उत्पादन कार्य करना, उनके लिए सहायता देना और प्रोत्साहन प्रदान करना।
  8. खादी के कार्य तथा ग्रामोद्योग में लगे व्यक्तियों और संस्थाओं जिनके अन्तर्गत सहकारी समितियाँ भी है, से समन्वय करना।
  9. खादी निर्माताओं द्वारा ग्रामोद्योग में लगे व्यक्तियों से सहकारी प्रयास को बढ़ावा देना तथा उसे प्रोत्साहित करना।
  10. किसी अन्य विषय का कार्यान्वयन, जो राज्य सरकार द्वारा नियमों के अन्तर्गत निर्धारित किया जाय।