(2)  अधिकारी और/कर्मचारियों की शक्तियां और कर्तव्य

Power and Duties of Officers and Employees


  1. मुख्य कार्यपालक अधिकारी -

  1. बोर्ड के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के रूप में कार्य करना।

  2. बोर्ड के कार्यक्रमों एवं नीतियों को क्रियान्वित करना।

  3. बोर्ड के समस्त अनुभागों, योजनाओं, अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर प्रशासकीय नियंत्रण रखना।

  4. ऐसे कर्तव्यों एवं दायित्वों का निर्वहन करना जो बोर्ड द्वारा समय-समय पर प्रतिनिधानित किये गये हैं।

  5. शासन/उद्योग को वार्षिक आय-व्यय चिट्ठा तथा योजनाओं का कार्यक्रम प्रेषित करना।

  6. बोर्ड के समस्त अधिकारियों तथा कर्मचारियों को अपने अनुशासन में रखना।

  7. बोर्ड के अधिनियमों के अनुसार बोर्ड तथा अन्य समितियों,उप समितियों की ओर से अध्यक्ष/उपाध्यक्ष के निर्देशानुसार बैठक का कार्यक्रम सुनिश्चित करना और बैठक की कार्यवाही का रिकार्ड रखना।

  8. समस्त महत्वपूर्ण पत्रों एवं मामलों को यथा समय बोर्ड के समक्ष रखना।

  9. बोर्ड एवं बोर्ड की समितियों के निर्णयों के अनुपालन हेतु निर्देश जारी करना।

  10. शासन द्वारा अनुमोदित आय-व्ययक प्राविधान के अन्तर्गत व्यय करना।

  11. बोर्ड तथा स्थायी वित्त समिति द्वारा निर्धारित पैटर्न आफ असिस्टेन्स के अनुसार व्यवस्थापकीय अनुदान, उत्पादन छूट आदि स्वीकृत करना।

  12. आयोग, शासन अथवा बोर्ड द्वारा निर्धारित पैटर्न आफ असिस्टेन्स के अनुसार व्यवस्थापकीय अनुदान, उत्पादन छूट आदि स्वीकृत करना।

  13. संस्थाओं, समितियों तथा व्यक्तियों को बोर्ड की ओर से बिक्री कर तथा चुंगी आदि की छूट के लिये आयोग या शासन के निर्देशानुसार प्रमाण-पत्र जारी करना।

  14. बोर्ड की ओर से विलेखों तथा इस प्रकार के अन्य कागजातों पर हस्ताक्षर करना।

  15. बोर्ड के कार्मिकों के सेवा सम्बन्धी प्रकरणों का निस्तारण करना तथा अनुशासनात्मक कार्यवाहियाँ करना।

  16. बोर्ड के अन्तर्गत बोर्ड के अधिनियम के अनुसार केवल मुख्य कार्यपालक अधिकारी/उपाध्यक्ष को ही बैंक से आहरण का अधिकार है, किन्तु प्रारम्भ से ही अर्थात् वर्ष 1960 से ही मुख्य कार्यपालक अधिकारी को ही आहरण एवं वितरण के अधिकार प्राप्त हैं।

  17. बोर्ड के अन्तर्गत सहकारी समितियों के गठन, पुनर्जीवीकरण एवं विघटन की कार्यवाही के लिए उ० प्र० सहकारी समिति अधिनियम 1965  एवं नियमावली 1968 के अन्तर्गत निबंधक के समस्त अधिकार प्राप्त हैं।

  1. वित्त नियंत्रक एवं मुख्य लेखाधिकारी -

शासन द्वारा एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा प्रतिनिधानित अधिकार एवं कर्तव्य :-

  1. बोर्ड के समस्त लेखा एवं वित्त के रखरखाव की देखभाल करना।

  2. बोर्ड के वित्तीय सलाहकार के रूप में कार्य करना।

  3. बोर्ड के समस्त लेखा तथा आडिट पर नियंत्रण रखना तथा बोर्ड की समस्त योजनाओं के वित्त नियंत्रक के रूप में कार्य करना।

  4. बोर्ड की वार्षिक एवं अन्य वित्तीय परिलेख समय से बनवाना एवं नियंत्रण रखना।

  5. बोर्ड के विभागीय तथा खादी ग्रामोद्योग आयोग से प्राप्त होने वाली सहायता के बजट बनाना।

  6. बोर्ड के लेखों को नियमानुसार बनाना तथा आडिट के समय प्रस्तुत करना।

  7. समस्त बिलों का भुगतान अथवा रिक्यूपमेन्ट/उपयोगिता प्रमाण पत्र से पूर्व जाँच कराना।

  8. बोर्ड के समस्त विभागीय कार्यालयों, केन्द्रों, पंजीकृत संस्थाओं, समितियों के लेखों का निरीक्षण करना।

  9. बोर्ड के समस्त क्षेत्रीय आहरण एवं वितरण अधिकारियों को लेखों के रख-रखाव, फार्मों का प्रयोग एवं लेखा नियमों सम्बन्धी निर्देश देना।

  10. बोर्ड को हस्तान्तरित सम्पत्ति एवं दायित्व की सूचियों को अन्तिम रूप से तय करना।

  11. बोर्ड के समस्त विभागीय योजनाओं की जाँच एवं वार्षिक लाभ-हानि का बैलेन्सशीट बनवाना।

  12. बोर्ड के समस्त लेखे तथा वित्त नियंत्रक के रूप में कार्य का उत्तरदायित्व।

  1. अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी -

  1. अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी-बोर्ड में मुख्य कार्यपालक अधिकारी के पर्यवेक्षण में कार्य करना।

  2. उद्योग के विकास कार्य हेतु पूर्णतया उत्तरदायित्वों का निर्वहन करना।

  3. मुख्यालय की विकास योजनाओं का अनुश्रवण करना और यथा विहित अवधि में मुख्य कार्यपालक अधिकारी तथा अध्यक्ष अथवा उपाध्यक्ष को जैसी भी स्थिति हो प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत कराना।

  4. विकास योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु जिन प्रयासों की आवश्यकता हो उन प्रयासों को सुनिश्चित कराना।

  1. वरिष्ठ संयुक्त मुख्य कार्यपालक अधिकारी - उपरोक्त

  2. संयुक्त मुख्य कार्यपालक अधिकारी - उपरोक्त

  3. उप मुख्य कार्यपालक अधिकारी -

परिक्षेत्र के अन्तर्गत आने वाले जनपदीय कार्यालयों के निरीक्षण एवं पर्यवेक्षकीय कार्य।

  1. परिक्षेत्रीय ग्रामोद्योग अधिकारी - तदैव

  2. प्राचार्य -

प्रशिक्षण केन्द्रों पर विभिन्न ग्रामोद्योगी योजनाओं के अन्तर्गत प्रशिक्षण से सम्बन्धित समस्त कार्य।

  1. सहायक निदेशक उद्योग -

  1. मुख्यालय से योजना का नियंत्रण, स्पेसिफिकेशन के अनुसार उत्पादन एवं सप्लाई कें संदर्भ में प्रयास करना।

  2. उत्पादन कार्यक्रम लक्ष्य निर्धारण एवं पूर्ति हेतु समय-समय पर निर्देश देना।

  3. बजट एवं व्यय पर नियंत्रण रखना।

  4. योजना की वार्षिक रिपोर्ट तैयार करना।

  5. खादी आयोग व शासन को प्रगति रिपोर्ट भेजना।

  6. योजना के सफल संचालन का उत्तरदायित्व।

  7. योजना की सर्वांगीण उन्नति जैसे- उत्पादन, प्रशिक्षण, अनुसंधान तथा प्रसार कार्य में समन्वय स्थापित करना तथा विभागीय सहकारी समितियों/संस्थाओं एवं व्यक्तिगत आधार पर संचालित केन्द्रों की समस्याओं का अध्ययन एवं निराकरण करना।

  1. सहायक निबन्धक सहकारिता -

औद्योगिक सहकारी समितियों का पंजीकरण, पुनर्जीवीकरण, विघटन, चुनाव तथा इनका अनुश्रवण निबन्धक/मुख्य कार्यपालक अधिकारी के निर्देशन में करना।

  1. विशेष कार्याधिकारी (कम्प्यूटर) -

कार्मिक, लेखा, योजना, नियोजन, समन्वय एवं अन्य विभागीय कार्यो का कम्प्यूटरीकरण सुनिश्चित कराना एवं क्षेत्र तथा जनपदों में स्थापित कम्प्यूटर का अनुश्रवण, विभाग से सम्बन्धित वेबसाइट एवं अन्य सूचनाओं का आदान प्रदान करना।

  1. प्रशिक्षक -

प्रशिक्षण केन्द्रों पर सम्बन्धित उद्योगों में तकनीकी मार्गदर्शन एवं प्रशिक्षण देना।

  1. जिला ग्रामोद्योग अधिकारी -

  1. अपने कार्य क्षेत्र में औद्योगिक सम्भाव्यता का सर्वेक्षण करना और उपलब्ध कच्चे माल का विवरण आदि रखना। खादी ग्रामोद्योग की इकाईयों को विस्तृत जानकारी उपलब्ध करवाना।

  2. क्षेत्र की सम्भावनाओं को देखते हुए औद्योगिक सहकारी समितियों अथवा संस्थाओं का गठन कराना, इस हेतु उनके कागजातों को तैयार कर नियमानुसार पंजीकृत कराना।

  3. खादी ग्रामोद्योग के विकास के उद्देश्य से कार्य करने वाली सहकारी समितियों/संस्थाओं के आर्थिक सहायता के मांगपत्रों को अपनी संस्तुति/निरीक्षण रिपोर्ट के साथ बोर्ड को प्रेषित करना।

  4. खादी तथा ग्रामोद्योग हेतु दी गयी सहायता का उद्देश्यानुसार उपयोग करवाने की कार्यवाही करना।

  5. खादी ग्रामोद्योगों की उत्पादित वस्तुओं के विक्रय/विपणन में सहायता देना।

  6. अपने अधीनस्थ तहसील अथवा विकास खण्ड स्तर पर कार्य करने वाले कर्मचारियों से योजनाओं का क्रियान्वयन कराना तथा उनको उचित मार्गदर्शन देना।

  7. समितियों/संस्थाओं एवं व्यक्तियों को दी गयी सहायता तथा प्रगति का विवरण संकलित कराना तथा मुख्य कार्यालय को समय पर भेजना।

  8. समय पर वाजिब ऋण तथा अन्य धन की वसूली करना और उसका विवरण मुख्य कार्यालय को भेजना।

  9. निष्क्रिय समितियों/संस्थाओं को पुनर्जीवित करने के लिए नियमानुसार कार्यवाही करना।

  10. अपने जिले की समस्त सहकारी समितियों/संस्थाओं के सम्बन्ध में वित्तीय तथा अन्य सूचनायें कार्यालय में रखना।

  11. बोर्ड के मुख्यालय द्वारा प्रसारित आदेशों का पालन करना।

  12. अन्य कृत्यों का वहन करना, जो समय-समय पर बोर्ड द्वारा दिये जायें।

  1. सहायक विकास अधिकारी (प्रथम/द्वितीय) -

लघु उद्योगों एवं ग्रामोद्योगों की स्थापना हेतु निम्न कार्यो को निष्पादित करना।

  1. सर्वेक्षण -

  1. क्षेत्र के कच्चे माल की उपलब्धता का सर्वेक्षण।

  2. आर्टिजन की संख्या का सर्वेक्षण तथा तकनीकी उपलब्धता का विवरण रखना।

  3. तैयार माल के लिए मार्केट की उपलब्धता का विवरण रखना।

  4. यातायात के साधनों/आर्थिक स्थिति आदि की सूचना रखना।

  1. संगठनात्मक कार्य -

  1. समितियों एवं संस्थाओं के गठन का प्रस्ताव तैयार करना।

  2. समितियों एवं संस्थाओं के सदस्यों को सम्बन्धित ग्रामोद्योग में प्रशिक्षण दिलवाना।

  3. मशीनरी उपकरणों की व्यवस्था करना।

  4. समितियों को तकनीकी सलाह देने हेतु मुख्यालय के अधिकारियों के माध्यम से व्यवस्था करना।

  5. ग्रामोद्योग की स्थापना हेतु ऋण एवं अनुदान उपलब्ध कराना।

  6. मुख्यालय स्तर पर समितियों/संस्थाओं एवं व्यक्तिगत उद्यमियों की कठिनाईयों को दूर करना।

  7. समितियों द्वारा उत्पादित माल की बिक्री की व्यवस्था करना।

  8. राजकीय कार्यालयों एवं विभागों से सम्पर्क स्थापित करके इकाईयों के माल सप्लाई की व्यवस्था में सहयोग करना।

  9. समितियों/संस्थाओं/व्यक्तिगत उद्यमियों को दिये गये ऋण अनुदान के सदुपयोग की जाँच करना।

  10. समितियों/संस्थाओं/व्यक्तिगत उद्यमियों से वसूली कराना।

  11. सुशुप्त पड़ी हुई समितियों के पुनर्जीवीकरण व बन्द समितियों को भंग करने की कार्यवाही करना।

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